मछली पालन आर्थिक स्थिति मजबूत करने का अच्छा साधन : डीसी
जिला में चालू वित्त वर्ष के दौरान अब तक 3 हजार 45 टन मछली का उत्पादन दर्ज
झज्जर, 06 अगस्त। डीसी कैप्टन शक्ति सिंह ने कहा कि मछली पालन आय बढ़ाने का बेहतरीन जरिया है,सरकार किसानों को मत्स्य पालन की दिशा में प्रेरित करने के उद्देश्य से अनेक योजनाएं चलाकर किसानों और मछली पालकों का भला कर रही है। डीसी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के दौरान अब तक तीन हजार 45 टन मछली का उत्पादन दर्ज किया गया है,जबकि विभाग द्वारा 44 किसानों को मछली पालन का प्रशिक्षण दिया गया है। इतना ही नहीं मत्स्य पालकों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत सब्सिडी के रूप में 27.57 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई है। उन्होंने बताया कि 13 पंचायती तालाबों को मत्स्य पालन के लिए किराए पर दिया गया है, जिससे प्राप्त राजस्व से पंचायतों की आय में भी बढ़ोतरी होगी और गांवों में विकास कार्यों को बढ़ावा मिल सकेगा।
डीसी ने मत्स्य विभाग की योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि किसानों और मछली पालन का व्यवसाय करने वाले लोगों के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना आर्थिक स्थिति मजबूत करने में वरदान सिद्ध हो रही है। योजना के तहत 40 से 60 प्रतिशत वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। डीसी ने बताया कि जिला में उन गांवों के लोगों को मत्स्य पालन के प्रति प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिन गांवों में बरसात के पानी के ठहराव होता है या भूमि बंजर है। मछली पालन से किसानों की आय बढ़ रही है। झींगा मछली पालन से 5 से 6 लाख रुपये प्रति एकड़ तक आमदनी होती है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा योजना के तहत अनुसूचित जाति व महिला वर्ग मछली पालकों को 60 प्रतिशत अनुदान तथा सामान्य वर्ग को मछली पालन पर 40 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।
कैप्टन शक्ति सिंह ने आगे बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 60 प्रतिशत सभी वर्गों की महिलाओं व अनुसूचित जाति को तथा 40 प्रतिशत सामान्य व ओबीसी को अनुदान प्रदान किया जाता है। इस योजना के तहत प्रार्थी निजी भूमि में या पट्टे पर भूमि लेकर मछली फीड हैचरी, तालाबों के निर्माण, बायोफ्लॉक, आरएएस, फीड मिल, कोल्ड स्टोर आदि लगाने पर विभाग से वित्तीय एवं तकनीकी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
यूनिट लगाने से पहले मिट्टी व पानी की टेस्टिंग जरूरी
डीसी ने बताया कि विभाग द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना तथा अन्य विभागीय योजनाओं के लिए किसानों को जागरूक करते हुए समय-समय पर विभाग द्वारा प्रशिक्षण भी दिया जाता है। यूनिट लगाने से पहले प्रशिक्षण अवश्य लें तथा मिट्टी व पानी की टेस्टिंग अवश्य रूप से करवाएं ताकि यूनिट कामयाब हो सके। उन्होंने किसानों से मत्स्य विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा संख्या में लाभ उठाने का आह्वान किया है।
