February 16, 2026

ग्रेटर नोएडा में खुले गड्ढे में डूबने से 3 साल के मासूम की मौत

ग्रेटर नोएडा, दिल्ली-एनसीआर में लापरवाही के खुले गड्ढे लगातार मासूमों और आम लोगों की जान ले रहे हैं। नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता और दिल्ली में कमल की मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि ग्रेटर नोएडा में एक और दर्दनाक हादसा हो गया। यहां दलेलगढ़ गांव में एक खुले गड्ढे में डूबने से तीन साल के मासूम बच्चे देवांश की जान चली गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद जहां एक ओर परिवार में मातम पसरा है, वहीं दूसरी ओर गड्ढे वाली जमीन के मालिकाना हक को लेकर ग्रामीणों और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बीच विवाद और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

सिकंदराबाद के सपौनी गांव निवासी राकेश की पत्नी अंजली अपने तीन साल के बेटे देवांश के साथ ग्रेटर नोएडा के दलेलगढ़ गांव आई थीं। यहां अंजली के मायके में डालेश्वर बाबा की समाधि पर उनके भाई देवेंद्र द्वारा आयोजित 41 दिन का धार्मिक अनुष्ठान चल रहा था। शनिवार को इस आयोजन का अंतिम दिन था और विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा था। इसी दौरान खेलता हुआ मासूम देवांश परिवार की नजरों से ओझल हो गया और पास ही मौजूद 6 से 7 फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरा।

भंडारे की व्यस्तता के बीच जब परिजनों ने देखा कि देवांश काफी देर से दिखाई नहीं दे रहा है, तो उसकी तलाश शुरू की गई। काफी ढूंढने के बाद भी जब उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो अचानक किसी की नजर समाधि स्थल के पास पानी से भरे उस गहरे गड्ढे पर पड़ी। वहां पानी के ऊपर बच्चे की टोपी तैरती हुई दिखाई दी। अनहोनी की आशंका से लोग फौरन गड्ढे में उतरे और बच्चे को बाहर निकाला। आनन-फानन में उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने देवांश को मृत घोषित कर दिया, जिसके बाद आयोजन स्थल पर चीख-पुकार मच गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

इस दुखद घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारी और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जिस गड्ढे में बच्चा डूबा, वह पशुचर (जानवरों के चरने की) जमीन पर है। ग्रामीणों के मुताबिक, कभी प्राधिकरण तो कभी अन्य लोगों ने मनमाने तरीके से यहां से मिट्टी खोदी, जिससे यह एक जानलेवा गड्ढा बन गया। बारिश और नालियों का पानी भरने से यह और भी खतरनाक हो गया था। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्राधिकरण से इसकी तारबंदी की मांग की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

वहीं, दूसरी तरफ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक एके सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जांच में यह खसरा संख्या 373 की भूमि पाई गई है, जो गंगाराम और धर्मवीर नामक किसानों की निजी संपत्ति है। इस कारण प्राधिकरण वहां सीधे तौर पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकता। एडीसीपी ग्रेटर नोएडा सुधीर सिंह ने बताया कि फिलहाल पीड़ित परिवार की ओर से कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। शिकायत मिलने पर पुलिस आगे की वैधानिक कार्रवाई करेगी।

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