April 10, 2026

मालेगांव केस में बरी होते ही लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को सेना ने दिया प्रमोशन; अब कहलाएंगे ब्रिगेडियर

नई दिल्ली, भारतीय सेना से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सेना ने लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित को ब्रिगेडियर के पद पर पदोन्नत करने को अपनी हरी झंडी दे दी है। उनका यह प्रमोशन 2008 के चर्चित मालेगांव बम विस्फोट मामले में हाल ही में मिली क्लीन चिट के बाद हुआ है। सेना का यह अहम फैसला सशस्त्र बल न्यायाधिकरण द्वारा लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित के रिटायरमेंट पर रोक लगाए जाने के ठीक बाद आया है। आपको बता दें कि पुरोहित 31 मार्च 2026 को रिटायर होने वाले थे। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पुरोहित ने अपने रुके हुए प्रमोशन और अन्य सेवा लाभों की बहाली के लिए न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद ट्रिब्यूनल ने रक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए साफ निर्देश दिया था कि जब तक उनकी वैधानिक शिकायत पर कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक उनके रिटायरमेंट पर रोक लागू रहेगी।

सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के सामने अपनी बात रखते हुए लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित ने दावा किया था कि मालेगांव ब्लास्ट मामले में फंसाए जाने और सालों तक चली लंबी अदालती कार्यवाही ने उनके शानदार सैन्य करियर को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस मामले में उन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे, लेकिन अदालत ने हाल ही में उन्हें पूरी तरह निर्दोष करार दिया है। पुरोहित ने ट्रिब्यूनल को बताया कि इस लंबी न्यायिक प्रक्रिया और देरी की वजह से उन्हें सेना के पदानुक्रम में वह प्रमोशन और अवसर नहीं मिल सका, जिसके वे हकीकत में हकदार थे।

आपको याद दिला दें कि इससे पहले 31 जुलाई को मुंबई की विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत ने लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित समेत अन्य लोगों को मालेगांव ब्लास्ट मामले में दोषमुक्त करार दिया था। अदालत ने अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट रूप से कहा था कि सरकारी वकील किसी भी उचित संदेह से परे आरोपियों पर लगे आरोपों को साबित करने में पूरी तरह से नाकाम रहे हैं। शुरुआत में इस गंभीर मामले में 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था, लेकिन अंतिम रूप से केवल सात लोगों के खिलाफ ही आरोप तय किए गए थे। अदालत ने कर्नल पुरोहित के साथ-साथ पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा, मेजर (सेवानिवृत्त) रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, अजय राहिरकर, सुधाकर धर द्विवेदी (शंकराचार्य) और समीर कुलकर्णी को भी सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था।

महाराष्ट्र के मालेगांव शहर में 29 सितंबर 2008 की तारीख काले अक्षरों में दर्ज है। इसी दिन भिक्कू चौक इलाके में एक मस्जिद के पास जोरदार धमाका हुआ था। एक मोटरसाइकिल में विस्फोटक बांधकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया था। इस भीषण ब्लास्ट में छह मासूम लोगों की जान चली गई थी, जबकि 95 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना की शुरुआती जांच महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने की थी, लेकिन साल 2011 में इस हाई-प्रोफाइल मामले को एनआईए को सौंप दिया गया। करीब 17 सालों तक चली व्यापक जांच और सैकड़ों गवाहों के बयानों के बाद आखिरकार अदालत ने सभी आरोपियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), आर्म्स एक्ट और अन्य सभी गंभीर धाराओं से पूरी तरह बरी कर दिया।

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